जतिन की शिवभक्ति और राष्ट्रप्रेम की अनूठी मिसाल : सुबह बासुकिनाथ में सेवा, फिर दिनभर तिरंगा यात्रा की तैयारी
दुमका। सुबह की पहली किरण के साथ बाबा बासुकिनाथ के दरबार में श्रद्धालुओं की सेवा और दिन ढलते ही तिरंगा यात्रा की तैयारियों में जुट जाना… यही दिनचर्या है दुमका के जतिन कुमार की। एक ओर उनके मन में भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था है, तो दूसरी ओर देश के तिरंगे के प्रति गहरा सम्मान और राष्ट्रसेवा का संकल्प। शिवभक्ति और राष्ट्रप्रेम का यह संगम जतिन के व्यक्तित्व को खास बनाता है।
राजकीय श्रावणी मेला के दौरान वर्ष 2017 से लगातार जतिन कुमार बाबा बासुकिनाथ धाम पहुंचकर कांवरिया तीर्थ यात्रियों की सेवा करते आ रहे हैं। इस वर्ष भी वे पूरी श्रद्धा के साथ श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर 12 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर रोटी बैंक दुमका के बैनर तले आयोजित होने वाली भव्य तिरंगा यात्रा की तैयारी भी जोर-शोर से चल रही है। यह उनकी छठी तिरंगा यात्रा होगी।
दुमका शहर के कुम्हार पाड़ा मोहल्ला निवासी जतिन कुमार सिदो कान्हु मुर्मु विश्वविद्यालय के एनएसएस स्वयंसेवक रह चुके हैं। सामाजिक सेवा और युवाओं को प्रेरित करने के उनके कार्यों के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में वे रोटी बैंक दुमका के संस्थापक हैं और जरूरतमंदों की सेवा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
वेबअखबार से बातचीत में जतिन ने बताया कि वे रोज सुबह करीब ढाई बजे बासुकिनाथ धाम पहुंच जाते हैं। वहां श्रद्धालुओं की सेवा करने के बाद दुमका लौटते हैं और फिर तिरंगा यात्रा की तैयारी में जुट जाते हैं।
जतिन कहते हैं कि बाबा बासुकिनाथ की भक्ति ही उन्हें समाज के लिए बेहतर कार्य करने की ऊर्जा देती है। उनके लिए भगवान शिव की आराधना और राष्ट्रसेवा अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही संकल्प के दो रूप हैं। बाबा की कृपा से मिले साहस के साथ वे समाज और देश के लिए अपना योगदान देने का प्रयास करते हैं।


