डूमरथर स्कूल में बच्चों और अभिभावकों ने मिलकर मनाया सीखने का उत्सव, गर्मी की छुट्टियों को बनाया ज्ञानोत्सव
जरमुंडी/दुमका। ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चों की पढ़ाई की निरंतरता बनाए रखने और गाँव में पढ़ने-लिखने की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दुमका जिले के जरमुंडी प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय डूमरथर के पोषक क्षेत्र में एक सप्ताह तक आयोजित “ग्राम शिक्षा संगम” कार्यक्रम ने शिक्षा को जनभागीदारी का उत्सव बना दिया। इस अभिनव पहल ने पूरे गाँव को एक खुले शिक्षण केंद्र में परिवर्तित कर दिया, जहाँ बच्चे, अभिभावक और समुदाय के लोग मिलकर सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को एफएलएन (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी) आधारित विभिन्न गतिविधियों से जोड़ा गया। नाम कार्ड के माध्यम से परिचय, पुस्तक पठन, संख्या ज्ञान विकसित करने के लिए दस-दस के बंडल बनाना, वस्तुओं की पहचान करना तथा समूह आधारित शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की बुनियादी शैक्षणिक दक्षताओं को सुदृढ़ किया गया। वहीं अभिभावकों ने भी बच्चों के साथ बैठकर पुस्तकें पढ़ीं, कहानियाँ सुनीं और सुनाईं तथा पुस्तकों पर चर्चा कर सीखने की प्रक्रिया को घर-घर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. सपन कुमार ने कहा कि शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज और समुदाय के सहयोग से ही यह एक जनआंदोलन का रूप ले सकती है। उन्होंने बताया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखना विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण होता है। इसी उद्देश्य से समुदाय, अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन समिति के सहयोग से ग्राम शिक्षा संगम का आयोजन किया गया, ताकि बच्चों की सीखने की गति अवकाश के दौरान भी बनी रहे। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का सबसे सकारात्मक परिणाम यह रहा कि बच्चों में पढ़ने की रुचि बढ़ी, अभिभावकों की सहभागिता मजबूत हुई और गाँव में शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल का निर्माण हुआ। अब बच्चे केवल विद्यालय में ही नहीं, बल्कि घर और समुदाय के बीच भी सीखने की गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। एक सप्ताह तक चले इस कार्यक्रम के समापन अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और अभिभावक उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ग्राम शिक्षा संगम ने यह साबित कर दिया कि जब विद्यालय, अभिभावक और समुदाय एक मंच पर आते हैं, तो शिक्षा केवल व्यवस्था नहीं रहती, बल्कि पूरे गाँव की संस्कृति और पहचान बन जाती है। डूमरथर की यह पहल ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में उभरकर सामने आई है। कार्यक्रम की सफलता में रामविलास मुर्मू, सोनावती बास्की, सुखलाल मुर्मू, श्याम मिर्धा, राजकुमार मंडल, सागर मंडल, बिटिया हांसदा, उपेंद्र भंडारी, पूजा कुमारी, मौसम कुमारी और लक्ष्मी कुमारी सहित अनेक ग्रामीणों एवं अभिभावकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी ने बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित करने तथा कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
